Right to Recall : Kya India Me Voters Ko Milega Beech Term Neta Ko Hataane Ka Adhikar?By dimagkibati.comनई दिल्ली:भारत में लोकतंत्र को और मजबूत बनाने को लेकर Right to Recall एक बार फिर चर्चा में है। संसद से लेकर सोशल मीडिया तक यह सवाल उठ रहा है कि जब जनता के पास अपने प्रतिनिधि को चुनने का अधिकार है, तो क्या उसे उसी प्रतिनिधि को काम न करने पर हटाने का अधिकार भी मिलना चाहिए। यही विचार Right to Recall के मूल में है।Right to Recall क्या है?Right to Recall एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता अपने चुने हुए प्रतिनिधि—जैसे सांसद या विधायक—को उसका कार्यकाल पूरा होने से पहले हटा सकते हैं। यदि कोई प्रतिनिधि जनता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता, विकास कार्य नहीं करता या भ्रष्टाचार जैसे आरोपों में घिरा होता है, तो Right to Recall के माध्यम से जनता उसे हटाने की मांग कर सकती है।Right to Recall पर चर्चा क्यों तेज हुई?हाल ही में Raghav Chadha ने Rajya Sabha में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जब मतदाताओं के पास प्रतिनिधि को चुनने का अधिकार है, तो Right to Recall भी होना चाहिए ताकि गैर-प्रदर्शन करने वाले नेताओं को बीच कार्यकाल में जवाबदेह बनाया जा सके। उनके इस बयान के बाद Right to Recall पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई।भारत में Right to Recall का इतिहासRight to Recall कोई नया विचार नहीं है। स्वतंत्रता आंदोलन के समय भी कई विचारकों ने प्रतिनिधियों की जवाबदेही पर जोर दिया था। Sachindra Nath Sanyal और M. N. Roy जैसे विचारकों ने लोकतंत्र को सिर्फ चुनाव तक सीमित न रखने की बात कही थी। उनका मानना था कि जनता के पास प्रतिनिधि को हटाने का अधिकार भी होना चाहिए, जो आज Right to Recall के रूप में जाना जाता है।वर्तमान में भारत में स्थिति क्या है?फिलहाल भारत में Right to Recall राष्ट्रीय स्तर पर लागू नहीं है। हालांकि कुछ राज्यों में पंचायत और स्थानीय निकायों में सीमित रूप से Right to Recall जैसी व्यवस्था मौजूद है। सांसद और विधायक स्तर पर इसे लागू करने के लिए संवैधानिक संशोधन और विस्तृत कानूनी प्रक्रिया की आवश्यकता होगी।समर्थन और विरोधRight to Recall के समर्थकों का कहना है कि इससे नेता अधिक जिम्मेदार बनेंगे और लोकतंत्र मजबूत होगा। वहीं विरोधियों का तर्क है कि बार-बार Right to Recall की प्रक्रिया शुरू होने से राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है और प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो सकता है। इसके बावजूद, यह साफ है कि Right to Recall पर सार्वजनिक रुचि लगातार बढ़ रही है।आगे की राहविशेषज्ञों का मानना है कि यदि Right to Recall को लागू किया जाता है, तो इसके लिए सख्त नियम, न्यूनतम हस्ताक्षर सीमा और निष्पक्ष प्रक्रिया जरूरी होगी, ताकि इसका दुरुपयोग न हो। आने वाले समय में संसद और नीति आयोग जैसे मंचों पर Right to Recall पर गंभीर चर्चा संभव है।निष्कर्षआज Right to Recall सिर्फ एक विचार नहीं, बल्कि जनता की बढ़ती जागरूकता का प्रतीक बन चुका है। यह तय करना बाकी है कि भारत का लोकतंत्र भविष्य में Right to Recall को अपनाएगा या नहीं, लेकिन इतना स्पष्ट है कि यह मुद्दा अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। Post navigationRaj Shamani Emmanuel Macron Podcast: Emmanuel Macron Ne India–France Relations, AI aur Global Politics Par Rakhi Khulkar Baat Dalmadi Bulldozer Action: वाराणसी के दलमंडी में बुलडोजर से मचा बवाल, BJP को 50 हजार वोटों के नुकसान की आशंका