Ankita Bhandari Case उत्तराखंड के सबसे चर्चित हत्याकांडों में से एक है, जिसने पूरे देश में आक्रोश और न्याय की मांग को जन्म दिया।उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में वर्ष 2022 में सामने आया अंकिता भंडारी हत्याकांड न सिर्फ एक जघन्य अपराध था, बल्कि इसने सत्ता, पैसे और अपराध के खतरनाक गठजोड़ को भी उजागर किया। 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की निर्मम हत्या ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। दो साल से अधिक चली जांच और अदालत की सुनवाई के बाद आखिरकार जनवरी 2024 में अदालत का फैसला आया, जिसने पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में एक अहम कदम माना गया।📌 कौन थीं अंकिता भंडारी?अंकिता भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले की रहने वाली थीं। वह अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए ऋषिकेश के पास यमकेश्वर क्षेत्र स्थित ‘वनंत्रा रिज़ॉर्ट’ में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम कर रही थीं। अंकिता एक साधारण परिवार से थीं और भविष्य को लेकर सपने देख रही थीं, लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनका कार्यस्थल ही उनके लिए मौत का कारण बन जाएगा।🏨 Vanantra Resort और मुख्य आरोपीयह रिज़ॉर्ट पुलकित आर्य का था, जो एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से संबंध रखता था। पुलकित आर्य के साथ इस मामले में दो अन्य कर्मचारी—सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता—को भी आरोपी बनाया गया।जांच में सामने आया कि अंकिता पर रिज़ॉर्ट में आने वाले “वीआईपी मेहमानों” को “खास सेवाएं” देने का दबाव बनाया जा रहा था, जिसका उसने विरोध किया। इसी विरोध के बाद अंकिता के साथ मारपीट की गई और बाद में उसकी हत्या कर दी गई।🚨 कैसे सामने आया मामला?18 सितंबर 2022 को अंकिता अचानक लापता हो गई। परिवार ने जब उसकी तलाश शुरू की और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, तब मामला धीरे-धीरे मीडिया की सुर्खियों में आया। शुरुआती दिनों में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे, लेकिन जनदबाव बढ़ने के बाद जांच तेज़ हुई।करीब एक हफ्ते बाद चीला नहर से अंकिता का शव बरामद हुआ, जिससे पूरे प्रदेश में आक्रोश फैल गया। लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किए और आरोपियों को कड़ी सजा देने की मांग की।🔍 जांच और SIT की भूमिकाAnkita Bhandari Case में SIT जांच और कोर्ट की कार्यवाही लगातार चर्चा में रही है।मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने विशेष जांच टीम (SIT) गठित की। SIT की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि:A.अंकिता पर अनैतिक दबाव बनाया गया थाB.आरोपियों ने मिलकर उसकी हत्या कीC.सबूत मिटाने की कोशिश की गईजांच के दौरान यह भी सामने आया कि हत्या से पहले अंकिता और आरोपियों के बीच तीखी बहस हुई थी।⚖️ कोर्ट में सुनवाई और अहम सबूतपूरे देश की नजरें Ankita Bhandari Case के फैसले पर टिकी हुई हैं।मामला कोटद्वार की अदालत में चला। अभियोजन पक्ष ने कई अहम सबूत पेश किए, जिनमें शामिल थे:1.कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR)2.गवाहों के बयान3.फॉरेंसिक रिपोर्ट3.घटनास्थल के डिजिटल और तकनीकी साक्ष्य4.अदालत में यह भी साबित हुआ कि अंकिता की मौत दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या थी। 📢 जनवरी 2024 का फैसला: दोषियों को सजालंबी सुनवाई के बाद जनवरी 2024 में अदालत ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी करार दिया। अदालत ने इस मामले को “रेयरेस्ट ऑफ द रेयर” मानते हुए कठोर सजा सुनाई (आजीवन कारावास), साथ ही जुर्माना भी लगाया।यह फैसला देशभर में उन लोगों के लिए एक संदेश था जो सत्ता या प्रभाव के बल पर कानून से ऊपर खुद को समझते हैं।🔥 जनता का आक्रोश और राजनीतिक असर Ankita Bhandari Case meअंकिता हत्याकांड ने उत्तराखंड की राजनीति को भी झकझोर दिया। मामले में आरोपी के राजनीतिक संबंध सामने आने के बाद सरकार और प्रशासन पर भारी दबाव बना। कई जगहों पर प्रदर्शन हुए, रिज़ॉर्ट को बुलडोज़र से गिराया गया और “बेटी को न्याय दो” के नारे गूंजे। 👩⚖️ महिलाओं की सुरक्षा पर बड़ा सवालयह मामला सिर्फ एक हत्या नहीं था, बल्कि कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल बनकर उभरा।X.क्या महिलाएं अपने कार्यस्थल पर सुरक्षित हैं?Y.क्या प्रभावशाली लोग कानून से बच सकते हैं?Z.अंकिता केस ने इन सवालों को राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बना दिया। 📌 आज भी क्यों याद किया जाता है अंकिता केस?अंकिता भंडारी केस आज भी इसलिए याद किया जाता है क्योंकि:A.यह सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण थाB.जनता की एकजुटता से जांच आगे बढ़ीC.अदालत का फैसला पीड़ित परिवार के लिए उम्मीद बना✔️ क्या सुरेश राठौर इस केस में शामिल हैं?पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर को अंकिता भंडारी मामले की जांच के लिए SIT (Special Investigation Team) ने पूछताछ के लिये बुलाया और उन्होंने लगभग 6 घंटे तक पूछताछ ki। लेकिन यह पूछताछ जांच तक सीमित थी, न कि किसी आरोप-आरोपित के रूप में गिरफ्तारी या दोषी करार की प्रक्रिया। वे साक्ष्य देने और अपने बयान देने के लिये आये थे। � 📌 ✔️ FIR / कार्रवाईइस मामले में सुरेश राठौर के खिलाफ कुछ FIR भी दर्ज हुए हैं, लेकिन ये FIR सीधे रेप/हत्या के लिये नहीं हैं.उदाहरण के लिये, एक FIR उनके और एक महिला (उर्मिला सनावर) के खिलाफ दर्ज की गई थी जिसमे उन पर डिफ़ेमेशन और सोशल मीडिया पर गलत आरोप फैलाने का आरोप लगाया गया था। �इसके अलावा एक अलग FIR में उन पर एक ठेकेदार का आरोप दर्ज हुआ है कि राठौर ने उसकी कार वापस नहीं की और उस पर गाली-गलौज और धमकी दी।अंकिता भंडारी हत्याकांड: इंसाफ की लंबी लड़ाई,📌 ✔️ वायरल आरोप और विवादकुछ सोशल मीडिया वीडियो और ऑडियो ऐसे वायरल हुए जिनमें राठौर की कथित आवाज़ से “VIP” या अन्य नामों का ज़िक्र किया गया, लेकिन पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अभी तक जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि कोई VIP या पूर्व विधायक सीधे रेप/हत्या से जुड़ा है।📌 ✔️ स्थिति अभी क्या है?➡️ फिलहाल राठौर पर सीधा आरोप सिद्ध नहीं हुआ है। ➡️ वे मामले की जांच में गवाह/आरोपित के रूप में पूछताछ दे चुके हैं, लेकिन कोई अंतिम अदालत निर्णय नहीं आया है कि वे रेप में शामिल हैं। ➡️ मामला एसआईटी और पुलिस जांच के अंतर्गत है, और साथ-ही राजनीतिक विवाद के कारण इसके बारे में अलग-अलग दावे भी सामने आ रहे हैं।📌 संक्षेप में (साफ-साफ बताना)❌ अभी तक कोई कोर्ट या पुलिस ने यह नहीं कहा है कि पूर्व विधायक सुरेश राठौर ने रेप या हत्या की है। ✔️ वे जांच के लिये पूछताछ दे चुके हैं, और कुछ एफआईआर दर्ज हैं, पर वे मृत्यु-अपराध के मुख्य आरोपियों में नहीं हैं।Important Note;“इस मामले में पूर्व विधायक सुरेश राठौर का नाम भी सामने आया था। पुलिस द्वारा उनसे पूछताछ की गई, हालांकि अब तक जांच में उनके खिलाफ रेप या हत्या से जुड़ा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है। पुलिस के अनुसार, फिलहाल वे आरोपी नहीं हैं और मामला जांच के दायरे में रहा है।”इस मामले से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए उत्तराखंड पुलिस और न्यायालय के रिकॉर्ड भी देखे जा सकते हैं।👉 https://uttarakhandpolice.uk.gov.in “अगर आपको ऐसी खबरों के लिए और जानकारी चाहिए, तो हमारे चैनल/वेबसाइट को सब्सक्राइब करें और कमेंट करना न भूलें। Thank you 🙏” Post navigationRussia Ukraine War 2026:रूस का हाइपरसोनिक मिसाइल हमला, दुनिया में बढ़ा तनाव Delhi Pollution News: दिल्ली में 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